Gaumukhasana aur Vakrasana Yoga: करने की विधि, फायदे और सावधानियाँ | Step by Step Guide

 

Introduction(परिचय):

वक्रासन- 

वक्र का मतलब होता है टेढ़ा  या मोड़ना आसन स्थति वक्रासन बहुत ही  सरल और प्रभाव साली आसन है।  

वक्रासन करने का विधि- 

वक्रासन करने के लिए सबसे पहले दोनों पैरों को सामने की तरफ फैलाए अब  अपने घुटने को मोड़े घुटने का रुख आसमान की तरफ रखें अब जो घुटना मुड़ा है, उसी के सामने वाला हाथ मुड़े हुए घुटने के उप्पर से लेजाते हुए, जो पैर सीधा रखा है, उस पैर के घुटने को पकड़ें। 

वक्रासन करने के लाभ-

वक्रासन करने से शरीर लचीला बनता है।  वक्रासन करने से मधुमेह की बिमारी पर नियंत्रण होता है।  वक्रासन करने से पाचन तंत्र मजबूत होता है। 

वक्रासन किन को नहीं करने चाहिए- 

कमर का कोई ऑपरेशन हुआ हो, तो वक्रासन  करने से बचें | गर्भवती महिलाएं वक्रासन करने से बचें।  यदि आपको गर्दन में कोई चोट लगी हो तो भी वक्रासन  करने से परहेज  करें। 



Introduction(परीचय):

आज की भाग दौड़ भरी ज़िन्दगी मैं शरीर और मन को स्वस्त रखना बेहद जरुरी है।  उसके लिए योग एक ऐसा माध्यम है।  जो केवल शरीर को ही स्वस्त नहीं रखता, बल्कि शरीर के साथ मन को भी स्वस्त रखता है। 

गौमुखासन;

गौमुखासन  एक ऐसा आसान है  जो कंधे, रीढ़की हड्डी के लिए बेहद लाभकारी माना  जाता है। गौमुखासन से करने से कंधे लचीले बनते हैं।  गौमुखासन न केवल कंधे, रीढ़की हड्डी के लिए बेहद लाभकारी माना  जाता है, बल्कि गौमुखासन करने से लंग्स(फेफड़े) मजबूत बनते हैं।  इस आसन को करने से पाचनतंत्र मजबूत बनता है। इस आसन को करने से गोपनीय रोग सही होते हैं।  

गौमुखासन करने की विधि :

१ .  सबसे पहले योग मेट पर सीधे बैठ जाए।  पैरों को  सीधा सामने की तरफ  फैला लें।  

२.  दाएं पैर को मोड़कर बाएं कूल्हे के निचे रखें, दोनो  घुटने  एक दूसरे के ऊपर चिपके हुए रहें । 

३ उसी प्रकार बाएं  पैर को मोड़कर दाएं  पैर के  कूल्हे के निचे रखें, दोनो  घुटने  एक दूसरे के ऊपर चिपके हुए रहें। 

४ अब जो पैर ऊपर की और है, उस वाले हाथ को सिर के ऊपर से लेजाएं तथा दूसरे वाले हाथ को पीछे से पीठ की तरफ से लजाते हुए, जो हाथ ऊपर है उसे पकड़ लें। 

५.  अगर हाथ पकड़ नहीं आये, तो बेल्ट  या रुमाल  का सहारा ले सकते हैं।  

६.  शरीर को सीधा सामने की  दिशा  कि और रखें। 

७.  अब धीरे-धीरे साँस लें और छोडे, इस में कपल भाँति भी कर सकते हैं। 

८.  छाती को सीधा रखें। 

९ इस अभ्यास को २०-३० सेकिंड तक करें। 

१० दोनों तरफ बराबर अभ्यास करें। 

गौमुखासन कौन-कौन नहीं कर सकता:

१ घुटनो में दर्द व चोट वाले  व्यक्ति गौमुखासन न करें 

२. घुटनो में सूजन, दर्द, गठिया आदि की समस्या हो तो गौमुखासन न करें। 

३ . अगर आपके कंधे जकड़े हुए है, और गर्दन में सरबाईकल की समस्या हो तो भी गौमुखासन न करें। 

४ . अगर आप को स्लिपडिस्क की समस्या हो तो भी गौमुखासन न करें। 

५.  अगर किसी को उच्च रक्त चाप की समस्या हो तो योग शिक्षक की देख रेख में ही करें। 








टिप्पणियाँ